सरल ह्रदय की थी तुम बहना(सामाजिक)-282
सरल हृदय की थी तुम बहना,
व्यक्तित्व तुम्हारा था बिन्दास.
आगन्तुक का स्वागत करना,
खुले हृदय से देतीं साथ।
भीतर - बाहर एक सी रहना,
यही तुम्हारी ख़ूबी थी।
पीड़ाओं को हॅसकर सहना,
ऐसे ही तुम जीती थीं।
दिल में चुभन कभी ग़र होती,
खुलकर कह देती वह बात।
निश्छल मन की मालिक थीं तुम,
व्यक्तित्व तुम्हारा था बिन्दास।
क्या भूलूॅ, क्या याद करूॅ,
ढेरों यादें हैं मेरे साथ।
प्यारी - मोटी के संबोधन से,
आगे बढ़ाती अपना हाथ।
तुम जहॉ रहो, जैसे भी रहो,
बस एक बार फिर से आना।
अपनी प्यारी भाभी के घर,
बिटिया बनकर ही आ जाना।
मैं भूल न पाऊॅगी तुमको,
तुम भूल न जाना मुझको भी।
ऊपर वाले से जिद करके,
वापिस आना मेरे घर ही।
दोनों मिलकर बॉटेंगे फिर,
वही पुरानी सारी बातें।
सोच - सोच कर पागल करतीं,
मुझको तुम्हारी प्यारी यादें।
मेरी श्रद्धाजॅली इतनी सी,
इसको ही तुम स्वीकार करो।
बस एक बार, फिर एक बार,
तुम आकर कैसे भी मिल लो।
श्रद्धाजॅली 7 /12/09
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