मन आपको दिया था(आध्यात्मिक)_303
मन आपको दिया था,
फिर क्यूँ भटकता है ये।
कसकर पकड़ो इसको दाता,
क्यूँ भगता है रे।
दाता आपने वादा किया था,
मुझको आप सॅभालेंगे।
अपने प्यार को दिल में रखकर,
मुझको ना गिरने देंगे।
जाने आप कहॉ चल दिये,
मुझको छोड़ अकेली रे।
भटक रही है दासी तुम्हरी,
कुछ तो आकर देखो रे।
आओ दाता आ जाओ अब,
कुछ तो सुनो पुकार मेरी।
बिखर गए सब सपने मेरे,
कुछ तो सुनो गुहार मेरी।
नहीं सॅभाला तुमने तो ये,
माला टूट बिखर जायेगी।
तुम्हरे नाम के मोती इसमें,
ना जाने फ़िर ये कहॉ जायेगी।
तुमने जिसको छोड़ दिया,
संसार के मायाजाल में।
उसको कौन सॅभालेगा इस,
जीवन के झॅझावात में।
कुछ तो सोचो, कुछ तो बोलो,
कुछ तो आज जबाब दो।
कहॉ मैं ढूॅढू, कहॉ मैं जाऊॅ,
छोड़ दिया मॅझदार में।
............... 24/3/16
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