दिले शायरी-9

तुम जो आ जाते हो ख़यालों में मेरे,
दिन और रात अच्छी गुजर जाती है,
ख्वाबों में जब दिखाते हो अपना जलवा,
लगता है कि ज़न्नत की रात आई है।

.......... कौन कहता है मैने तुझे भुला रखा है,
तेरी यादों को गले से लगा रखा है,
ऑखों में ऑसू भी नहीं, लव पै आहें भी नहीं,
मैंने हर ग़म को अपने सीने में छुपा रखा है।

........... ना मालूम मुझे ख़ुदा कैसा होगा,
शायद तेरी सूरत जैसा होगा,
क्या बताऊँ तुझे उसी ख़ुदा की कसम,
तेरा आना जन्नत की तरह,
तेरा जाना मुझ पै कयामत की तरह आया।

तुझको क्या....... मालूम,?
मुझपै क्या गुजरी तेरे जाने के बाद,
बेसहारा हो गई मैं तो, तेरे जाने के बाद।
अब तो तेरी यादों के, सहारे जीना होगा,
तेरी यादें ही मुझको हॅसायेंगी.... रूलायेंगी,
तेरी सूरत ही मुस्करायेगी, मेरी यादों के साथ।

                                              @शशिसंजय

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