दाता सब कुछ तुम्हें समर्पित(आध्यात्मिक)-280

दाता सब कुछ तुम्हें समर्पित,
धन हो या फिर हो औलाद।
मेरे मन को आप बना दो,
आध्यात्मिकता की फौलाद।
-ये सब मेरा, वो सब मेरा,
ऐसा भाव न आने पाए।
सब कुछ छोड़ तुम्हीं में मन हो,
तुम बिन प्राण न जाने पाये।
-मेरे प्राण विलय हों तुममें,
तुम बिन मेरा न कोई वजूद।
आस - पास सब बिलख रहे हों,
तुम हॅसते होंगे मौजूद। 
- - दाता आप दया के सागर,
रीती पड़ी है अब तक गागर।
करुणा, ममता, प्रेम, दया से,
अब तो भर दो पूरा सागर।
-जब भी छलके, प्रेम ही टपके,
और न कुछ गिरने देना।
"हया"की की चुनरी ओढ़ ली मैने,
इसको ना उड़ने देना।
-भगवन आप, आप ही गुरूवर,
आप ही प्रीतम आप प्रियेतर।
सब कुछ आप, आप में सब कुछ,
कैसे हो बस इसमें विसर्जन।
-शायद तड़प है अभी अधूरी,
होती मन की आस न पूरी।
तुम बिन कैसा खालीपन है,
हरपल रोता मेरा मन है।
-प्यारे दाता आ भी जाओ,
आ भी जाओ, आ भी जाओ।
अपनी कृपा के झरने से,
तुम मुझको भी नहला जाओ।
-मन हो शीतल, तन हो शीतल,
वायु, अग्नि सब हों शीतल।
भीतर, बाहर सब कुछ शीतल,
आ जाओ तुम शीतल - शीतल।
                                - - - - - - 22/10/08

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