गर तुम न मिलते(आध्यात्मिक)-341

"ग़र तुम न मिलते इस जीवन में
प्रेम की कीमत हमें मालूम न होती
जिसे प्यार समझे बैठे थे हम
वह तो ज़िन्दगी से बेवफाई होती "

-जन्मदिन पर आपको
क्या दूॅ उपहार,
तन नहीं सेवा के काबिल,
धन नहीं है पास।
मन समर्पित कर रही हूॅ,
डोर तुम पकड़े रहना।
मन न चंचल हो सके बस,
ऐसी आप कृपा करना।
-भटकाती हैं बारम्बार,
मन की चंचल वृत्तियॉ।
आप यदि थामे रहे तो,
फ़िर न होंगी गलतियॉ।
भेंट यदि ले सकें,
ले लीजिए दुष्वृत्तियाॅ।
मन न भटके, तन न भटके,
फ़िर न हो कुछ ख़ामियॉ।
-आप हैं दाता भला,
हम मॉगते हैं आपसे।
आपको क्या दे सकेंगे,
ऋण हैं कितने आपके।
आपके लायक बनें,
यह योग्यता दे दीजिये।
काम गुरू का कर सकें,
वह पात्रता दे दीजिये।
-आप प्रेमी वो पिता हैं,
आप पूजा वो विधा हैं।
मन को थामे आप रहिये,
तन चलायेंगे पिता हैं।
ग्यान वश में है नहीं,
अग्यानता है पास में।
हे प्रभो इस ढोर (गॅवार) को,
रखना हमेशा साथ में।
-ये तन तो क्या, ये धन तो क्या,
हर जन्म है उपहार में।
बस -? आपको लेना पड़ेगा,
भार अपने हाथ में।
अन्तिम समय जब प्राण निकले,
आप आ जाना प्रभो।
गुरुदेव से तब मॉग लेना,
ये प्राण अपने साथ में।

"हर जिन्दगी का कतरा, मिले आपकी उमर में,
बस आपकी उमर फ़िर, बढ़ती रहे सफ़र में।
देखेंगे आपको सब, जीयेंगे जब तलक भी,
यही हसरते तमन्ना, यही दिल की आरजू भी। "

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