होलिका दहन पर(आध्यात्मिक)-292
होलिका दहन पर,
चरणों में है नमन।
संताप - ताप हर लो,
ऐसा ही हो मनन।
दोष और दुर्गुण,
जल जायें मेरे सारे।
कीचड़ और धब्बे,
जितने लगे हैं सारे।
भट्टी में जब गुरु की,
चढ़ती है गन्दी चादर।
वे साफ इतना करते,
देते सभी को आदर।
चादर सफेद कर दो,
दिल इसमें अपना रख दो।
कुछ प्यार के से छींटे,
कुछ अपना रंग भर दो।
ऐसा नशा चढ़ा दो,
ऐसी घुटी पिला दो।
ना कुछ भी मुझको दीखे,
तेरा नशा हो बाकी।
भॉग ऐसी दे दो,
बस झूमती रहूॅ मैं।
जब कदम लड़खड़ायें,
तुम थाम लो यूॅ आकर।
जीवन में रंग सारे,
अच्छे ही भरते रहना।
काले पुराने धब्बे,
सब साफ करते रहना।
दाता तुम्हारी रंगत,
सब रंगों से बढ़ी है।
जो चाहो रंग भर दो,
चादर सड़ी गली है।
- - - - - - - 7/3/09
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