पागल(आध्यात्मिक)-348

दाता तुम्हारे प्यार ने
पागल बना दिया।
होली के इस त्यौहार ने
तो खूब रूला दिया।
क्या खेली थी होली,
मैंने आपके साथ।
उस याद ने माहौल को,
रंगीन बना दिया।
हंसते रहे थे आप,
जब खेली थी होली।
रंगों ने आपको और भी,
हंसीं बना दिया।
अब खालीपन सा लगता है,
त्यौहार पर मुझे।
जाकर के तुमने दिल का,
चिराग बुझा दिया।
आ जाओ मेरे दाता,
खेलो फिर से होली तुम।
मस्ती में भर दो मुझको,
फिर से मेरे प्राणों के पिया।
                         ............. 24/3/16

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