दिले शायरी-15
..... आज मुझे बिसरी सी कुछ याद आई,
बचपन में झूलती मॉ की गोद याद आई,
काश...? फ़िर से वो दिन लौट आयें,
दुनियॉ से बचाने वाले ऑचल की फ़िर याद आई।
....... हमको भरम ये है कि सब कुछ हमारा है,
तू भी बड़ा जालिम केवल मुस्कुराता है,
देकर भी जताता नहीं ऐसा ख़ुदा हमारा है।
........ तुम मेरे जीवन में ऐसे समा जाओ,
कि चारों तरफ सूरत तेरी ही दीखे,
भीगी रहें पलकें फिर भी मुस्कुराते रहें,
भीतर में तेरी सीरत जो दीखे।
@शशिसंजय
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