अब तो आ जाओ(आध्यात्मिक)-287
अब तो आ जाओ दरश दिखा दो,
मेरे प्रीतम तुम्हें ढूॅढते हैं।
जाने कब तेरा दीदार होगा,
सबसे तेरा पता पूॅछते हैं।
तुझे देखे बगैर व्याकुल,
मेरी ऑखें भी पथरा गईं हैं।
छुपके पीछे से मुखड़ा दिखा दो,
जिस मुखड़े को हम ढूॅढते हैं।
मुझे इतना पता है मेरे दाता,
तुम भी भूले नहीं हो यूॅ मुझको।
क्या करूॅ चैन आता नहीं है,
जब तक सिज़दा हम करते नहीं हैं।
तेरी तस्वीर से यूॅ लिपटकर,
लगता है मैं गले से लगी हूॅ।
तेरे चरणों में यूॅ ही बिलख कर,
अश्रु गिरना ही क्यूॅ चाहते हैं।
मैं गइया तुम्हारी हूॅ व्याकुल,
मुझसे आकर मिलो मेरे कान्हा।
सबसे तेरा ठिकाना है पूछा,
एक तुम हो कि मिलते नहीं हो।
दर्द तेरा इबादत है मेरी,
अश्रु मेरे इनायत है तेरी।
तेरी तस्वीर फ़िर भी है दिल में,
जिसको सौ - सौ दफ़ा चूमते हैं।
- - - - - - - - - - 13/11/08
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