ऑखिन देखी(सामाजिक)-352
आज के दिन ज़्यादातर मॉयें
अपने बच्चों के लिए
अघोई अष्टमी का त्यौहार मनाती हैं
और अपने बेटों के लिए
दिन भर भूखे रहकर
उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं
पति के लिए व्रत, संतान के लिए व्रत,
लक्ष्मी के लिए व्रत, पति व बच्चों की
तरक्क़ी के लिए व्रत-उपवास,
सभी कुछ----? औरत के हिस्से में आते हैं
जिनके लिए ताउम्र दुआयें करती रही
वही मॉ बच्चों के लिए बुढ़ापे में
बोझ बन जाती है
यही सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी
चलता ही जाता है
फ़िर वही जवान बहू मॉ बन जाती है
आगे जाकर वह भी बूढ़ी मॉ होकर
झेलने लग जाती है वही सिलसिला
पीढ़ी दर पीढ़ी का
आख़िर कब तक--------?
💔💔🖤💔💔
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