अमृतवाणी-94/95/96

अमृतवाणी
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आप लोगों को मैं रीछ और बन्दर के रूप में देवता
मानता हूँ। आज फिर उसी ऐतिहासिक घटना की
पुनरावृत्ति होने जा रही है।आप लोग पहले जन्म के
देवता हैं।अकेले में जब कभी आपको शान्ति का
समय मिले,एकान्त का समय मिले,तब आप अपने
अन्दर झॉककर देखना कि आप रीछ-बन्दर हैं या देवता हैं।वास्तव में आप देवता हैं।देवताओं के सिवाय आड़े वक़्त में कोई और काम नहीं आ सकता,देवता ही काम आते हैं।आप लोगों में से हर
एक को मुझे यही कहना है कि आपको जब कभी
अपने आप में मौक़ा मिले तो कहना कि गुरुपूर्णिमा
के दिन गुरुजी ने कहा था कि हमारे भीतर देवता बैठा हुआ है,देवता विराजमान है।देवता जो काम
किया करते हैं,वे जिस काम के लिये अपना जीवन
लगाया करते हैं,जिसके लिये पुरुषार्थ किया करते
हैं,वही पुरुषार्थ हमारे सुपुर्द किया गया है।

                          परमपूज्य गुरुदेव
                  (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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मित्रो ! दूसरी बात यह कहनी थी कि जब महाभारत
युद्ध हुआ था,तब अर्जुन यह कह रहा था कि हम तो
पॉच पांडव हैं और कौरव सौ हैं और उनके पास विशाल सेना भी है,जबकि हमारे पास सेना भी नहीं
है,थोड़े से पॉच-पचास आदमी हैं।ऐसे में भला युद्ध
कैसे हो सकता है ? हम मारे जायेंगे।इसलिये वह बार-बार मना कर रहा था और कह रहा था कि
महाराज हमें लड़ाइये मत,इसमें हमको सफलता नहीं मिल सकती।आप हिसाब लगाइये कि इनसे लड़कर हम फ़तह कैसे पा सकेंगे ? जीत कैसे सकेंगे
? तब भगवान ने उससे कहा था कि देखो अर्जुन,इन
सबको तो मैंने पहले से ही मारकर रखा है और तुम्हारे लिये सिंहासन सजाकर रखा है।तुम पाँचों को सिंहासन पर बैठना पड़ेगा,राज्य करना पड़ेगा,ये तो सब मरे-मराये रखे हैं,तुम तो ख़ाली तीर-कमान
चलाओगे।इसी तरह जो काम मेरा था सो मैंने करके
रखा है ।

                              परमपूज्य गुरुदेव
                     (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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इस युग को बदलने के संबंध में जो महत्वपूर्ण कार्य
करने हैं,उनके संबंध में आपको श्रेय तो भर लेना है।
जीतना किससे है और हारना किससे है ? न किसी से हारना है,न किसी से जीतना है।न किसी को मारना है और न कोई पुरुषार्थ करना है।आपको तो
विजयी होने का श्रेय मिलना चाहिये और वही श्रेय
आपको प्राप्त करना है।अर्जुन ने भी प्राप्त किया था।इससे पहले जब वह ज़्यादा बहस करने लगा था
कि मेरे बाल-बच्चे हैं,मेरा काम हर्ज हो  जायेगा,फ़लाना हो जायेगा,मुझे टाइम नहीं है,तब
कृष्ण भगवान झल्ला पड़े थे और उन्होंने एक हुक्म
दिया-‘तस्मात् युद्धाय युजस्व’ लड़,दुनिया भर के
बहाने मत बना,लड़ाई कर।भगवान हमारा क्या होगा?यह पूछने पर श्रीकृष्ण ने कहा था कि तेरी
ज़िम्मेदारी हम उठाते हैं,तू युद्ध कर ।

                           परमपूज्य गुरुदेव
                   (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

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