गुरुगीता-6

एक बार दो व्यक्ति राबिया से मिलने आये । बातचीत के दौरान राबिया ने खाने को पूछा तो वो भूखे थे इसलिए मना नहीं किया । राबिया के पास दो रोटियाँ थी । वह दोनों ही रोटियाँ उन दोनों को खिलाने वाली थी लेकिन तभी एक भिखारी मांगता हुआ आ पहुँचा । राबिया ने वह दोनों रोटियाँ उस भिखारी को दे दी । अब उन लोगों के खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा ।
थोड़ी ही देर बाद राबिया की एक सेविका उनके लिए रोटियाँ लेकर आई । राबिया ने रोटियों को गिना तो 18 रोटियाँ थी । उसने वापस कर दिया । सेविका ने बहुत मनाया लेकिन राबिया नहीं मानी । कुछ देर बाद वो सेविका फिर आई, इस बार उसके पास 20 रोटियाँ थी । राबिया ने कुबूल कर ली और उन दोनों व्यक्तियों के सामने रख दी ।
यह सब देखकर वह दोनों अचंभित थे । उनमें से एक व्यक्ति  ने गंभीरता से पूछा – “ यह सब क्या है ? 18 रोटियाँ हमारे लिए बहुत ज्यादा थी फिर भी आपने 20 होने पर ही क्यों कुबूल की ।” तो राबिया बोली – “मेरे पास दो ही रोटियाँ थी जो मैं आपको देना चाहती थी लेकिन तभी भिखारी आ गया । इसलिए मैंने उसे दे दी । मेरा खुदा से वादा है, कि वो मुझे एक के बदले दस देगा, तो फिर मैं कम क्यों लूँ । मैंने दो रोटियाँ दी तो खुदा के वादे के अनुसार मुझे बीस रोटियाँ मिलना चाहिए । बस इसीलिए मैंने 18 रोटियों को कुबूल नहीं किया ।
यह सौ आना सच है कि भगवान/गुरु/ख़ुदा/वाहेगुरु/जीसस
जिनमें भी आपको भरोसा है वे दस गुना ज्यादा ही देते हैं ।

गुरुगीता पाठ
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वेदशास्त्रपुराणानि इतिहासादिकानि च।
यन्त्र-मंत्रादि-विद्यानां मृत्युरुच्चाटनादि कम्पनी ।।7।।
शैव-शाक्तागमादीनि अन्यद् बहुमतानि च ।
अपभ्रंशानि शास्त्राणि जीवानां भ्रांतचेतसाम्।।8।।
अन्वयः-
वेदशास्त्र - वेदशास्त्र, पुराणानि - सब पुराण, च - और,
इतिहासादिकानि - इतिहास इत्यादि, यन्त्र-मंत्रादिविद्यानाम-
यन्त्र-मंत्र आदि विद्या, मृत्युरुच्चाटनादिकम् - मारण उच्चारण आदि, शैव-शाक्तागमादीनि - शैव शाक्त आगम समूह, च - और, अन्यद् बहु -और बहुत से, मतानि मत -
जीवानां - जीवों का, अपभ्रंशानि- अपभ्रंशकर हैं ।।7-8।।
अर्थ-
वेदशास्त्र, पुराण,इतिहास इत्यादि, यन्त्र-मंत्र आदि विद्या मारण उच्चाटन आदि अभिचारकर्म, शैव शाक्तगण का आगम समूह और अन्य बहुमत निखिल शास्त्र गूरु लाभ के बिना भ्रांतचित्त जीव के पतन के कारण होते हैं ।।7-8।।
7-8 .
Tha knowledge of Vedas, Scriptures, puranas and history ect .Yantras, and Mantras, demonic activities like (Maran)
Killing (Uchchatan)disturbing mental pose (tha Agamas)Tantrik texts of Shaivas
and Shaktas (tha Worshippers of Shiva and Shakti) and many other scriptures
Propagating manifold cults generate confusion only in the mind of the individual and become responsible for the downfall of the individual without the grace of the Master.
                                         👣🙏

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