अमृतवाणी-82/83/84
अमृतवाणी
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गायत्री महामंत्र जो विवेक,सदविचार,सद्भावना,
प्रेरणा,शालीनता,उज्जवल भविष्य,नये युग का
मंत्र है,यह सारे विश्व में फैलने वाला है।यह
मत्स्यावतार की तरह फैलने वाला है,यह हम आपको दिखा देंगे।ब्रह्माजी ने जिस मछली को
कमण्डलु,तालाब,नदी,समुद्र में डाला था वह बढ़ती
चली गई।आने वाले दिनों में यह गायत्री भी इसी
प्रकार बढ़ने वाली है आप विश्वास रखें।इस प्रकार
की कथा आपने सुनी है,परन्तु हमारे जैसा नाचीज़
आदमी यह कह रहा है,आप नोट कर लें।आगे
गायत्री भी मछली के रूप में सारे विश्व में फैलने
वाली है।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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हमने संकल्प लिया है कि देश के अन्दर से निरक्षरता को हम मिटायेंगे तथा लोगों को साक्षर
बनायेंगे।सरकार यह काम नहीं कर सकती है।वह
तो प्राइमरी स्कूल की व्यवस्था ही नहीं देख पाती है।जैसे स्वामी केशवानन्द जी ने शेखावटी के गॉवों
में मुट्ठी फ़ण्ड योजना के द्वारा प्राइमरी स्कूल खोला
था।हम भी उस योजना को सफल करेंगे।इसके साथ ही हर आदमी की सेहत की ज़िम्मेदारी हम
उठायेंगे जो असंयम,ख़ानपान,रहन-सहन के कारण
चौपट हो गई है।हम उसे लोगों को समझाकर
परिवर्तन करेंगे।आज जो अनास्था संकट हावी हो
गया है उसे हम दूर करेंगे।हम बहुत से काम करेंगे।
आज सामाजिक कुरीतियाँ जो बढ़ रही हैं उसे हम
समाप्त करेंगे।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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भगवान करे आपको भी सामर्थ्यवान देवी प्राप्त हो
आपको भी ऋद्धि-सिद्धि मिले।जो हमें ऋद्धि-सिद्धि
का चमत्कार मिला है,वह आपको भी मिले।हमें लाखों आदमियों के ऑसुओं को पोंछना अच्छा लगता है।आप भी गायत्री माता से माँगिये।आप तो केवल अपने लिये मॉगते हैं।आप समाज के लिये,
राष्ट् के लिये माँगिये तो इसके साथ आपको भी
मिलेगा।हमें वर्तमान और भविष्य काल दोनों ही
शानदार दिखलाई पड़ रहा है।हम गायत्री माता से
यही प्रार्थना करते हैं कि हे माता ! हमें दया,करुणा,
क्षमा,शालीनता और ममता दीजिये।मित्रों ! आपको
भी यही मॉगना चाहिये।यही हमारी,गायत्री माता तथा महाकाल की प्रेरणा है।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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मित्रो ! मैं आपको इस नवरात्रि अनुष्ठान के बारे में
बताते हुये मूलभूत सिद्धांतों की समीक्षा कर रहा था
यहॉ हमने आपको दबोचा है,क्यों ? क्यों कि आप अपने सोचने के तरीक़े से लेकर रहन-सहन,आहार-
विहार के तरीक़ों को जब तक इस ग़लत प्रकार से
अख़्तियार किये रहेंगे,सुधार और हेर-फेर नहीं करेंगे
तब तक आपकी एक भी समस्या हल नहीं नहीं होने
वाली।नहीं गुरुजी ! आप तो वरदान-आशीर्वाद देते
हैं।सिद्ध पुरुष हैं।हॉ,हैं।हम वरदान भी देते हैं व आशीर्वाद भी । लोगों को चमत्कार भी दिखा देते हैं
यह बात भी सही है।पर हम देते उन्हीं को हैं जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं,पहले अपने आपको
ठीक करने के लिये एक क़दम आगे बढ़ाते हैं।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
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