दिले शायरी -18
--भुला के नींद अपनी तुझे मैं सुलाती थी,
चूमकर ऑसू तेरे तुझको मैं हँसाती थी,
हर इक ख्वाहिश दिल की थी तुझसे ऐ दिल के टुकड़े,
तभी तो बचपन में मैं तुझको भइया ही बुलाती थी ।
--"मुझे मुहब्बत है
अपने हाथ की हर ऊँगली से
न जाने तुमने कौन सी ऊँगली
पकड़कर था चलना सीखा"
--इन प्यास भरी आँखों के सिवा
उस जग में अपना था ही क्या
सब को देखा चलते चलते
सब को खोया खोते खोते
जब याद कोई आ जाती है
यूँ दिल की कली खिल जाती है
जैसे ख़्वाबों की दुनिया में
बच्चा हँस दे सोते सोते
क्या जानिए दिल पे क्या बीती
क्या जानिए आँख ने क्या देखा
क्यूँ चौंक के उठ उठ पड़ते हैं
हम रातों को सोते सोते
फ़सलें बीतीं मौसम बदला
और वक़्त ने यूँ क्या कुछ न किया
वो दाग़ न दिल से दूर हुआ
इक उम्र कटी धोते धोते!!
--नज़र में हर दुश्वारी रख
ख़्वाबों में बेदारी रख
दुनिया से झुक कर मत मिल
रिश्तों में हमवारी रख
सोच समझ कर बातें कर
लफ़्ज़ों में तहदारी रख
फ़ुटपाथों पर चैन से सो
घर में शब-बेदारी रख
तू भी सब जैसा बन जा
बीच में दुनिया-दारी रख
एक ख़बर है तेरे लिए
दिल पर पत्थर भारी रख
ख़ाली हाथ निकल घर से
ज़ाद-ए-सफ़र हुश्यारी रख
शेर सुना और भूका मर
इस ख़िदमत को जारी रख
yrics By: नासिर काज़मी
Performed By: गुलाम अली
ग़म है या खुशी है तू
मेरी ज़िन्दगी है तू
आफतों के दौर में
चैन की घड़ी है तू
गम है या खुशी...
मेरी रात का चिराग
मेरी नींद भी है तू
गम है या खुशी...
मैं खिज़ां की शाम हूँ
रूत बहार की है तू
गम है या खुशी...
दोस्तों के दरमियाँ
वजह दोस्ती है तू
गम है या खुशी...
मेरी सारी उम्र में
एक ही कमी है तू
गम है या खुशी...
मैं तो वो नहीं रहा
हाँ, मगर वोही है तू
गम है या खुशी...
'नासिर' इस दयार में
कितना अजनबी है तू
गम है या खुशी...
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