सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-9
लगातार 6 माह हो गये थे कारागार में जाते हुये कि अचानक महिला जेल से भी बुलावा आने लगा, इधर बालिका सदन, नारी निकेतन,और बालिका गृह में जहाँ हम सभी जा रहे थे ।वहां पर और बहनों को भेजना शुरू किया । बालिका सदन से वहॉ की व्यवस्थापिका जी ने वहॉ के कर्मचारियों(पति-पत्नी) को भेजा तथा कहलवाया कि बच्चे बहुत याद करते हैं और तंग भी करते हैं, उन्हें लगता है कि मैंने आप लोगों को मना किया है ? समझ नहींआरहा था कि क्या करें ! आखिरकार यह तय किया कि पूर्णिमा को पुरुष जेल, अमावस्या को महिला जेल, महीने के बाकी गुरुवार को अन्य जगहों पर जायेंगे, अपनी समस्या जब अधीक्षक महोदय को बताई, तो महिला जेल के नाम पर तो मुहर लगा दी, लेकिन हम लोग माह में एक बार ही आयेंगे, सुनकर शान्त रहे, जब उन्हें सारी बात बताई तो खुश होकर बोले-अरे ये तो नेक काम है, बच्चों के पास तो जाना चाहिये । इस तरह से पूर्णिमा को पुरुष जेल जाने लगे ।
धीमे-धीमे एक अपनापन हमारे बीच में बढ़ने लगा । पहले केवल यज्ञ तक ही सीमित थे,अब थोड़ा-थोड़ा वे लोग अपने बारे में भी बताने लगे । यज्ञ के साथ उन्हें यज्ञ कराने का अभ्यास भी कराने लगे, ताकि जब भी ये लोग बाहर निकलें तो जीवन बदलकर गुरुदेव के काम में लग सकें । महीने में एक बार आने से थोड़ी सी नाराजगी जरूर थी।लेकिन गुरुदेव रचित साहित्य रहने से वे पढ़ने में व्यस्त हो गये । अब केवल ये काम रह गया था कि पुस्तकालय में गुरुदेव का साहित्य पढ़ना फिर हमारे पहुँचने पर जिज्ञासा शांत करना । कुल मिला कर हमारी परीक्षा होने लगी । हम सभी गुरुदेव से मन ही मन प्रार्थना करते कि-
"हे, गुरुदेव आप ही इनकी जिज्ञासा शांत कर सकते हैं,हम सबकी वाणी में, व्यवहार में, दिलों में, दिमाग में आप विराजमान हों,ताकि आपके अपने मासूम बच्चे आपके प्यार को भरपूर प्राप्त कर सकें"। उन युवाओं में एक बहुत ही चँचल और बहुत ही वाचाल भाई था कमलेश(परिवर्तित नाम)। उसमें यज्ञ सीखने की रुचि थी लेकिन गुस्सा इतना कि बिगड़ गये, तो रूठ कर चले जाना । हम लोग ज्यादा कुछ नहीं बोलते थे क्यों कि धैर्य के साथ दिल जीतना था,ये भाई भी पड़ौसी के बेटे की हत्या के ज़ुर्म में अन्दर आ गये थे । यज्ञ के बाद जब हम लौटते तो उसकी बैरक पर रुक कर उसे बाहर बुलवाकर प्यार से समझाते । और अगली पूर्णिमा तक गुस्सा शांत करके मंत्र याद करने की कहकर आते ।
क्रमशः !
'गुरुकॄपा केवलम्'
"गुरुवर शरणम् गच्छामि"
👣🙏
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