गुरुगीता-50

एक बार एक महात्मा अपने शिष्यों के साथ कुम्भ के मेले का भ्रमण कर रहे थे। वहां विचरण करते समय उन्होंने एक साधु को माला फेरते और साधना करते देखा। उन्होंने पाया कि साधु बार-बार आंखे खोलकर देख लेता कि लोगों ने कितना दान दिया है। वो हंसे और आगे बढ़े। 
थोड़ी दूर जाकर देखा कि एक पंडितजी भागवत वाचन कर रहे थे लेकिन उनके चेहरे पर शब्दों के कोई भाव नहीं थे। वे तो बस यंत्रवत बोले जा रहे थे और चेलों की जमात उनके पास बैठी थी। इस पर महात्मा खिलखिलाकर हंस पड़ेे। वे थोड़ा-सा आगे बढ़े ही थे कि देखते हैं एक युवक बड़ी मेहनत और लगन से रोगियों की सेवा कर रहा है। उनके घावों पर मरहम लगा रहा है और उन्हें बड़े प्रेमभाव से सांत्वना दे रहा है। 
महात्मा ने उसे देखा तो उनकी आंखें भर आईं और वे भावुक हो गए। जैसे ही महात्मा अपने शिष्यों के साथ अपने आश्रम पहुंचे तो शिष्यों ने गुरु से पहले दो जगह हंसने और एक जगह भावुक होने का कारण पूछा। 
गुरु ने कहा, पहली दो जगहों पर तो मात्र आडंबर ही था लेकिन भगवान की प्राप्ति के लिए केवल एक ही आदमी था जो व्याकुल दिखाई दे रहा था। वही व्यक्ति था जो पूरे मनोयोग के साथ लोगों की सेवा कर रहा था। उसकी सेवा भावना को देखकर मेरा मन द्रवित हो गया और मैं सोचने लगा कि जाने कब जनमानस धर्म के सच्चे स्वरूप को समझेगा। मात्र वही एक व्यक्ति था, जो धर्म का महत्व और उसके मर्म को समझ रहा था।
साधु बोले कि धर्म की सेवा का कोई विज्ञान या परिभाषा नहीं होती, मानव सेवा ही सही मायनों में धर्म और समाज की सेवा है।  
गुरुगीता पाठ
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न गुरोरधिकं न गुरोरधिकं न गुरोरधिक: न गुरोरधिक:।
मम शासनत: मम शासनत: मम शासनत: मम शासनत:।।54।।
अर्थ
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गुरु से असाधारण कोई भी नहीं है।गुरु से अतिशय कोई भी
नहीं है, गुरु से उत्तम कोई भी नहीं है, गुरु से बलवान कोई भी नहीं है, मेरे शास्त्र से, मेरे उपदेश से,मेरी आज्ञा से, मेरे पालन से यह अवगत हो अर्थात् मैं जिस तरह गुरु की सर्व
श्रेष्ठता जानकर उनका निर्देशपालन अर्थात् ध्यान करता हूँ,
उसी प्रकार ध्यान करो।।54।।
54.
There is none extra-ordinary as compared
to the Master there is nothing beyond him
there is no body better than him and there is no body powerful than him. May this be
Known to all through my scriptures, my
preachings, my orders, and my administration. It means that the way I
having realised the per excellence of the Master and carry out the instructions i.e.
meditate upon him, the rest should also meditate on him that way.
                                       👣🙏

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