अमृतवाणी-55/56/57
अमृतवाणी
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दूसरे लोग जब गड़बड़ा जाते हैं तो डाकू या उठाई-
गीर बन जाते हैं और क्या करेंगे ? गुण्डे की सामर्थ्य
बस सामान उठाने,मारपीट करने,हत्या करने तक की
है किन्तु जब ब्राह्मण बाग़ी हो जाता है तो वह ब्रह्म -
राक्षस बन जाता है।अत: ब्रह्मराक्षस होने की लानत
अपने सिर पर ओढ़ने से हमें इन्कार करना चाहिये
और समय रहते चेत जाना चाहिये।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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युग की पुकार है कि ब्राह्मण जागे।आप कौन हैं ?
हम तो कायस्थ हैं।भई यहॉ वंश परम्परा का ज़िक्र
नहीं हो रहा,विचार परम्परा की दृष्टि से आप जहॉ
बुध्दिजीवी हैं,वहॉ आप ऐसी परम्परा के अनुयायी भी हैं,जो आदमी को उसके कर्तव्यों,उत्तरदायित्वों की जानकारी कराती है।यदि ऐसा न होता तो आप हमसे क्यों जुड़ते ? मैं सोचता हूँ कि आपके भीतर
कहीं न कहीं ऋत है।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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ऋत जो भगवान का सबसे बड़ा अनुदान है।हमारे
व आपके लिये एक बहुत बड़ा काम करने को पड़ा है।काम यह है कि जो कुछ भी विचार का क्षेत्र हमारे
सामने फैला पड़ा है,इसके भीतर से इसके अध्यात्म
को हम निचोड़ें।हमको साइन्स की साइन्स ढूँढनी है।
वह मूल ढूँढना है,जिन सिध्दान्तों को लेकर के आदमी ने साइन्स बनाने व बढ़ाने के लिये क़दम
बढ़ाया ।यह दोनों काम किये बिना इतने बड़े बुध्दि
के जँजाल को काट सकना हमारे लिये सँभव न हो
सकेगा ।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
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