अमृतवाणी-85/86/87
अमृतवाणी
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नवरात्रि अनुष्ठान में यही अध्यात्म के मूलभूत सिद्धान्त मैंने आपको समझाने का प्रयास किया
कि आप अपने पैरों पर खड़ा होना सीखिये।अपने
चिन्तन और व्यवहार को सही ढंग से रखना सीखिये
आपकी अब तक की ज़िन्दगी बहमों में बीत गई।अब उनसे मुक्ति पाना सीखिये।अपने आपको
दबोचना सीखिये यह नवरात्रि अनुष्ठान का तपश्चर्या वाला हिस्सा है,जिससे हमने आपको अपने आप पर नियन्त्रण करना सिखाया।यह बताया
कि कम खाने से शरीर का कोई नुक़सान नहीं बल्कि लाभ ही होता है।इसलिये आपको आदतें बदलकर
उपवास करना सिखाया,अस्वाद व्रत समझाया।
आध्यात्मिक प्रगति के रास्ते का यह पहला क़दम है।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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आहार संयम के बाद हमने आपको कहा था कि
आपको विचारों पर संयम रखना आना चाहिये।
आपको ब्रह्मचर्य से रहना चाहिये।गायत्री माता का
फ़ोटो आपने रखा था अपने सामने व उसी की आरती रोज़ करते रहे।क्यों ? कभी सोचा आपने !
मूर्ति क्यों रखी है,सोचा आपने ? बताइये इस चित्र
और मूर्ति को देखकर कि इसकी उम्र कितनी होनी
चाहिये ? आपने देखा कि यह बीस साल की जवान
युवती जैसी है।अस्सी साल की बुढ़िया तो नहीं है ?
नहीं गुरुजी,वह तो उठती उम्र की जवान षोडषी दिखती है।आपका ख़याल ठीक है।यह हमने जान-
बूझ कर बनाई है।गायत्री माता की असली उम्र तो न
जाने कितनी है ?
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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जब हम अपने गुरुजी की उम्र सात सौ साल बताते
हैं तो सोच सकते हैं कि गायत्री माता की उम्र क्या व
कितनी होगी ? उस उम्र की आप कल्पना भी नहीं कर सकते।सृष्टि जितनी पुरानी है,उससे भी कहीं
अधिक आयु की यह गायत्री माता हैं।फिर सोलह
साल की यह सुन्दर नयन-नक्शों वाली युवती क्यों
बनाई ? अरे ! हमने आपको विचार करना सिखाया कि युवा नारी के बारे में आपको पवित्र दृष्टि रखते
हुये यौन शुचिता का अभ्यास करना चाहिये।आप
बेहूदे हैं।नारी को बाहर के तरीक़े से देखते हैं।नारी में
आपको माता,बहिन,बेटी नहीं दिखाई पड़ती।आपको तो सब वैश्या ही वैश्या दिखाई पड़ती है।
हम आपकी दृष्टि बदलना चाहते हैं।कामुकता प्रधान चिंतन से आपको निकालकर एक नई दृष्टि
देना चाहते हैं।यही मानसिक ब्रह्मचर्य है।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
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