गुरुगीता-53

वनवास के समय एक बार भगवान श्रीरामचंद्र ने लक्ष्मणजी से कहा "भाई ! एक कुटिया बनाओ।"
लक्ष्मण जी ने पूछा :"कहाँ बनाऊँ ?
श्रीरामजी ने कहा : जहाँ तुम्हारा मन चाहे,वहाँ बना लो।
इतना सुनते ही लक्ष्मणजी एकांत में जाकर फूट-फूटकर रोने लगे। सीताजी ने श्रीरामजी से कहा :"आपने लक्ष्मण से क्या कह दिया? वे बड़े दुःखी हैं,फूट-फूटकर रो रहे हैं।"
श्रीरामजी ने कहा :"मैंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा ।" वे तुरंत लक्ष्मणजी के पास पहुँचे और उन्हें पुचकारकर उनकी पीठ पर हाथ फेरते हुए बड़े प्यार से बोले :
*"भ्राता ! क्या बात है,रो क्यों रहे हो ?"*
अपने प्रियतम का स्पर्श पाकर तो लक्ष्मणजी और जोर-से रोने लगे। श्री रामजी ने उन्हें पुचकारा,
सांत्वना दी,उनके आँसू पोछे व पूछने लगे :"भैया लक्ष्मण ! बात तो बताओ। मुझे अपने दुःख का कारण बताओ।"
*बड़े कष्ट से लक्ष्मणजी बोले : परवानस्मि काकुत्स्थ.... 【वाल्मीकि रामायण】*
*हे ककुत्स्थ कुलभूषण ! मैं तो पराधीन हूँ। मैंने तो अपना तन मन सर्वस्व आपके चरण समर्पित कर दिया है।*
*आपने कहा : जहाँ तुम्हारा मन करे,जहाँ तुम्हें अच्छा लगे,वहाँ कुटिया बना लो।*
*राघव ! अब यह मन मेरा कहाँ है ?*
"भैया बड़ी भूल हुई । अब चलो,मैं तुम्हें स्थान बताता हूँ।"
फिर एक स्थल की ओर संकेत करते हुए श्रीरामजी बोले :
यह स्थान एक-सा है,चौरस है,सुंदर है,यहीं कुटिया बनाओ।
अपने स्वामी की आज्ञा पाकर लक्ष्मणजी प्रसन्नतापूर्वक वहाँ कुटिया बना दी।
भगवत्कृपा-पात्र बनने की एकमात्र शर्त यही है कि अपना सर्वस्व प्रभु के चरणों में समर्पित कर दें अपनी कहलानेवाली कोई वस्तु रहे ही नहीं लक्ष्मणजी की भाँति अपना सर्वस्व भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
गुरुगीता पाठ
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ज्ञेयं सर्वमनित्यं च ज्ञानं च मन उच्यते ।
ज्ञानं ज्ञेयं समं कुर्यात् नान्यआत्मद्वितीयक:।।56।।
अर्थ
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सब ज्ञातव्य पदार्थ को अनित्य और ज्ञान को मन कहा जाता है, ज्ञान और ज्ञेय पदार्थ को समान करें, आत्मा को
छोड़कर कुछ भी दूसरा नहीं है।।57।।
जिस प्रकार कारण रूप मिट्टी से कार्य रूप घड़ा, थाली इत्यादि बनते हैं, कार्य विभिन्न प्रकार का होने पर भी सब कारण मिट्टी के अलावा और कुछ नहीं है।उसी प्रकार कारण परमात्मा स्पंदन जात ये सारे पदार्थ अनित्य है,केवल एक मात्र वही सत्य है।।57।।
57.
All knowledgeable objects are perishable and knowledge is termed as Master. The
knowledgeable objects and the knowledge be equated and there is nothing else but the soul.
COMMENTS :
Just as a pitcher and pot etc. (effects i.e. objects) are made out of earth (cause)and though different, all of them are nothing else
but the earth (cause). Similarly, soul is the only truth, rest all objects are non-eternal.

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