अमृतवाणी-76/77/78

अमृतवाणी
————
गायत्री माता किसी समय वेदमाता बनीं थीं,जिन्होंने
सारे वेदों को जन्म दिया था।सारी संस्कृति एवं
सभ्यता को जन्म दिया था।उस समय यह गायत्री
माता वेदमाता बनीं थीं। उसके बाद गायत्री माता
देवमाता बनीं।हिन्दुस्तान के निवासी देवता थे।वे
स्वयं तो खाते कम थे,पर खिलाते अधिक थे।उन्होंने
खाया कम,खिलाया ज़्यादा।ऋषियों ने खाया कम,
खिलाया ज़्यादा।यहॉ के नागरिकों ने ख़ाया कम,
खिलाया ज़्यादा।यहॉ के नागरिकों ने सारी दुनिया
में अपनी सम्पदा को बॉट दिया।वे विदेशों में चले
गये,इन्डोनेशिया,अमेरिका आदि सारी दुनिया में चले
गये और अपनी प्रतिभा को वह बिखेरते चले गये।
वे देवमानव थे।

                               परमपूज्य गुरुदेव
                       (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
————
मित्रो,अगले दिनों लोगों को खाने से ज़्यादा मज़ा
खिलाने में आयेगा।अकेले खाने वालों को अगले
दिनों लोग यह कहेंगे कि आपको शर्म नहीं आती
है,आप खाते चले जाते हैं।आपको शर्म आना चाहिये।पड़ोसी तथा पीड़ित-पतित एवं भूखे लोग
आपको दिखलाई नहीं पड़ते हैं,मक्कार कहीं का।
केवल अपना पेट,अपनी बीबी,अपने बच्चे ही दिखलाई पड़ते हैं।आपके भीतर से जब गायत्री
माता उदय होंगी तो आपको चमकाकर रख देंगी।
आपके विचारों में परिवर्तन कर देंगी।आपको सारा
परिवार,समाज,देश दिखलाई पड़ेगा।आप देवता
बनते चले जायेंगे।गायत्री माता हँस पर बैठकर
कमण्डलु लेकर नहीं आती हैं,वह केवल करुणा के
रूप में ,दया के रूप में आपके अन्दर आयेंगी।यही
उसका स्वरूप है जो आपको देवता बनाकर जायेगी।

                         परमपूज्य गुरुदेव
                 (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
————
अगले दिनों इन्सान के भीतर से देवता जगेगा।हमने इसके साथ यह भी कहा है कि धरती पर स्वर्ग का अवतरण होगा।अगले दिन दुनिया में बहुत शानदार
एवं अच्छी परिस्थितियॉ आयेंगी।ज़माना बहुत सुन्दर
आयेगा।धर्म,संस्कृति,भगवान सब एक हो जायेंगे
ताकि कोई आपस में न लड़ सकें।अगले दिनों भाषायें भी एक हो जायेंगी।जो आपस में लड़ती-मरती हैं,वह एक हो जायेंगी।अगले दिनों आचार एवं
संस्कृति एक हो जायेगी।पर्व जो आयेंगे,उसमें सबको छुट्टी मिलेगी।कोई एक व्यक्ति का पर्व नहीं
होगा।संस्कृति,सभ्यता,इन्सान,राष्ट् एक होने वाला
है।

                               परमपूज्य गुरुदेव
                      (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कुछ यूं है तेर शुकराना-429

शुकराना -424

याद आपकी-428