अमृतवाणी-103/104/105
अमृतवाणी
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हिन्दुस्तान के बारे मे उसकी भविष्यवाणी है कि
हिन्दुस्तान का अध्यात्म और पाश्चात्य का तत्व विज्ञान यह दोनों आपस में मिल जायेंगे,पाश्चात्य
भौतिक विज्ञान और अध्यात्म मिल जायेंगे,रूस और
हिन्दुस्तान मिल जायेंगे,चीन से अमेरिका की लड़ाई
हो जायेगी,आदि-आदि बहुत सी भविष्यवाणियाँ हैं
उन बहुत सी भविष्यवाणियों में से आपके काम की
एक ही है कि हिन्दुस्तान सारी दुनिया का नेतृत्व करेगा,जैसा कि आजकल अमेरिका कर रहा है।चाहे
वह बम बनाये,चैलेन्जर बनाये,स्टारवार की योजना
बनाये,किन्तु बाद का नेतृत्व भारत करेगा।हिन्दुस्तान
को सारी दुनिया का नेतृत्व करने के लिये बड़े कर्मठ
व्यक्ति चाहिये,बड़े शक्तिशाली और क्षमतासम्पन्न
व्यक्ति चाहिये,बड़े लड़ाकू योद्धा चाहिये,बड़े इंजीनियर चाहिये,बड़े-बड़े समर्थ आदमी चाहिये और वही मैं तलाश कर रहा हूँ। बेटे,तुममें योग्यता
नहीं है तो तुम्हें योग्यता हम देंगे।तुम्हारी खेती-बाड़ी
को ही नहीं सँभालूँगा,वरन योग्यता भी दूँगा,ताकि
तुम संसार का नेतृत्व कर सको।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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हमने जो लड़ाई छेड़ी है वह दुष्प्रवृत्तियों के विरूद्ध छेड़ी है और सत्प्रवृत्तियों के संवर्द्धन की छेड़ी है।
रामराज्य की स्थापना की छेड़ी है और लंका-दमन
की छेड़ी है।यह काम बहुत बड़ा है और इसमें कुछ
मुसीबतें भी आयेंगी,पर उन मुसीबतों को आप तक
नहीं पहुँचने देंगे।उन मुसीबतों को अपने ऊपर लेते
रहेंगे।राणा सांगा जो था,उसे जहॉ कहीं भी दीखता
कि उसके साथियों पर गाज गिरी,उनके ऊपर की
तलवार अपने शरीर पर झेल जाता था।उसने ढेरों
आदमी इस तरह बचा दिये थे।जब उसके शरीर पर
अस्सी घाव हो गये तब वह बेहोश हो गया और अपना काम बन्द कर दिया।अस्सी घाव खाने तक तो कोई मुसीबत आपके ऊपर नहीं आयेगी।मुसीबत
आयेगी तो हमारे ऊपर आयेगी।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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मुसीबत हमारे ऊपर पहले भी आई थी।श्री कृष्ण भगवान के पास आई थी।रामचन्द्र जी पर भी मुसीबत आई थी।सीताहरण हो गया था।किसी का
क्या हो गया ? लेकिन हमारे ऊपर एक और तरह की मुसीबत आयेगी,जिसकी जानकारी आपको देना चाहता हूँ।वह मुसीबत इस तरह की है जैसे कि
कालनेमि ने पैदा की थी।कालनेमि रावण का कुटुम्बी था।स्कन्दपुराण में कथा आती है कि वह सबकी बुद्धि बिगाड़ देता था।छोटा भाई कुम्भकरण
था।उसने योगाभ्यास किया,तप किया।वह चाहता
था कि 6 महीने जगा करूँ और एक दिन सोया करूँ
लेकिन कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि बिगाड़ दी,
भ्रष्ट कर दी कि कुम्भकरण यह मॉगने लगा कि 6 महीने सोया करूँ,और एक दिन जगा करूँ।अगर वह
6 महीने जगा होता तो रावण का ढेर हो गया होता।
इसी तरह मारीचि ने भी तप किया था। वह स्वर्ग चाहता था,पर कालनेमि ने उसकी ऐसी बुद्धि भ्रष्ट की और कहा कि तू यह मत मॉग कि मैं स्वर्ग जाऊँ,
वरन यह मॉग कि सोने का हिरण बन जाऊँ।कारण,
चमड़े वाले को तो मारता है एक आदमी,पर सोने वाले को मारेंगे सौ आदमी।बेचारा छिपा-छिपा बैठा
रहता था अपने वेष को बनाये।एक बार सोने का वेष
बनाया,सो सीताजी के कहने पर रामचन्द्र जी ने उसे
मार डाला।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
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