सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-27

लगातार बन्दी भाई अनुष्ठान किये जा रहे थे तथा भावयज्ञ भी अनवरत् चल रहा था कि अचानक नेमी (बदला हुआ नाम) की तबियत खराब हो गई।चक्कर, बुखार आदि।जब हम जेल पहुँचे तो उसके बाकी साथियों ने बताया कि 100-125 माला रोज़ करता है रात भर ध्यान में रहता है और इसको समझाओ तो हमें ही चिल्लाता है।खाने-पीने का भी ध्यान नहीं रखता, हम लोग इसका खाना लेकर रखते हैं लेकिन ये कभी खाता है तो कभी नहीं। सुनकर हम लोग जेल की डिस्पेंसरी उसको देखने गये,तो कुछ लोगों ने कहना शुरू किया-अजी कौन सी पूजा सिखाई थी, इसमें तो भूत भर गया है।कोई आत्मा आ गई है।कोई कहता-अरे इसकी घरॉली (घरवाली) की आत्मा आ गई है।जितने लोग उतनी बातें।समझ नहीं आ रहा था कि अब कौन सी परीक्षा देनी है।प्रशासन के एक ब्राह्मण अधिकारी कहने लगे-अजी मैडम ये गायत्री मंत्र है कोई खेल-तमाशा नहीं  ? इनको गायत्री मंत्र नहीं बुलवाना चाहिए,और आप तो ---माइक पर बुलवाते हो ये तो घोर अपराध है। जैसे-तैसे हाथ जोड़कर डिस्पेंसरी पहुँचे, नेमी को देखा तो अपने आप में कुछ बड़बड़ाये जा रहा था।जैसे ही उसके सिर पर हाथ फेरते हुए हाल पूछा तो बोला मैं ठीक हूँ, कुछ नहीं हुआ है ।
डॉक्टर से बात करने पर पता चला कि नींद पूरी नहीं होने
तथा खाना भी ठीक से नहीं खा पाने के कारण ऐसा हुआ है ।जल्दी ही ठीक हो जायेगा। डिस्पेंसरी से वापस आकर सभी ने यज्ञ किया और यज्ञ का प्रसाद व यज्ञ की विभूति
उस तक खिलाने,दो भावनाशील बच्चों को भेजा, तथा कहलवाया कि इसमें गुरुजी की दवा है जो रोज़ शहद में
मिलाकर खानी है।एक बन्दी भाई की ड्यूटी यही थी कि रोज़ उसे शहद और विभूति मिलाकर चटायें। शायद इसी बहाने प्रेम का कुछ अधिक विस्तार आपस में गुरुदेव करा रहे थे।हम सभी लोग अब नेमी के जल्दी स्वस्थ हो जाने कीप्रार्थना में जुट गए क्यों कि अफ़वाहों का बाज़ार गर्म हो चुका था गायत्री के दुष्प्रचार में। कहीं कोई रुकावट न आ जाये ये सोचकर कुछ ज़्यादा ही परेशान थे।तब जो समझदार बच्चे थे,वे समझाने लगे कि हम इसका पूरा ध्यान रखेंगे, आप बिलकुल चिन्ता न करें।जो लोग विरोध कर रहे हैं, वे सब ठीक हो जायेंगे।आप निश्चिन्त होकर घर जाओ।
  
                                  क्रमशः!
                            'गुरुकॄपा केवलम्'
                        "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                    👣🙏

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