सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-5
उन्हीं शैतान ग्रुप में एक भाई था मंगला (परिवर्तित नाम)
दोनों भाई आ गये थे जमीनी विवाद में । बहुत काम करता, सारी तैयारियां कराता, तरीके से सबको बैठाता, देखने में लगता कि कितना मेहनती और समझदार है हम सभी के सामने अच्छी इमेज थी उसकी । बाद में जब-- और भाई हम सभी से घुल मिल गये तो उन्होंने बताया कि ये सब लोगों पर दादागीरी दिखाता है ।किसी के भी घर वाले मिलने आते और कुछ थोड़ा बहुत सामान खाने-पीने का देकर जाते तो वह उनसे छीन लेता । शिकायत करने पर डराता धमकाता था । धीरे-धीरे प्यार से जब उससे बात की,तो रो उठा वह ? घर में कभी प्यार नहीं मिला, कोई मिलने भी नहीं आता था, सौतेली माँ ने पिता को भी सौतेला बना दिया था । आखिरकार गुंडागर्दी की संगत में पड़ गया ।कुछ राजनीतिक लोगों ने भी उसकी स॔गत का लाभ अपने फायदे के लिए उठाया, बाद में अपने रास्ते से अलग कर दिया ।
गुस्सा तेज़ लेकिन मिलनसार । उसे लगता था कि हर व्यक्ति ने उसका भरपूर फायदा उठाया, यहाँ तक कि जो भाई अन्दर कारागार में था उसने भी । भगवान कृष्ण के प्रति आस्था थी, पर उनसे भी नाराज़ था, उसे लगता था कि उन्होंने भी उसकी कोई सहायता नहीं की ? काफ़ी समय लगा इस सदमे से उबरने में उसको । लेकिन जब प्यार और श्रद्धा उमड़ी तो इतनी कि गुरुदेव ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया । जब वह पैरोल पर बाहर निकला तो सबसे पहले शान्तिकुन्ज आश्रम पहुँचा । 10 दिन वहॉ पर रहा ।सुबह से रात तक के सारे कार्यक्रमों में भाग लेता । बाद में अन्दर आने के बाद बेहद बदलाव । हर समय गायत्री मंत्र के जप में तल्लीन रहता । लोगों की आगे बढ़-चढ़ कर सहायता करता। अन्य अपराधों में तो नहीं पकड़ा गया, लेकिन मारने की कोशिश (attempted to murder) के तहत अन्दर आना पड़ा । हमेशा कहा करता यदि मैं यहॉ नहीं आता तो यज्ञ की महिमा कैसे गाता, गायत्री मंत्र कैसे जपता ।अरे यह मंत्र तो मेरे कन्हैया ने भी जपा था । 10 साल बाद जब वह बाहर निकला तो 1 माह तक शान्तिकुन्ज रहा । लगभग 2साल बाद उसकी शादी हो गई । सुखी जीवन व्यतीत करने लगा । लेकिन आज जब याद आती है तो लगता है जैसे कल की ही बात हो । गुरुदेव माताजी इन सब अपने बच्चों पर हमेशा कृपा बनाये रखें बस यही प्रार्थना है।
क्रमशः----
'गुरुकॄपा केवलम्'
"गुरुवर शरणम् गच्छामि "
👣🙏
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