अमृतवाणी-97/98/99

अमृतवाणी
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साथियो ! आज गुरुपूर्णिमा का दिन है,आप में से हर
एक आदमी की,देवता की ज़िम्मेदारी हम उठाते हैं।
देवता जब रीछ-बन्दर बनकर चले आये थे तो पीछे
उनके घर बीबी-बच्चे रह गये थे,कुटुम्ब रह गया था,
उन सबको भगवान ने सँभाला था।आपके घर को
संभालने की,व्यापार को संभालने की,खेती-बाड़ी को संभालने की,हारी-बीमारी को संभालने की ज़िम्मेदारी हमारी हैऔर यह सब ज़िम्मेदारियॉ हम
उठाते हैं।आप हमारा काम कीजिये हम आपका काम करेंगे।हम आपको यक़ीन दिलाते हैं,आप हमारा विश्वास कीजिये हम आपका काम ज़रूर
करेंगे।पिता ने बच्चे का हर काम किया है।पिता से
बच्चे ने जब जो मॉगा है,दिया है।

                                 परमपूज्य गुरुदेव
                         (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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पिता से बच्चे ने जब जो मॉगा है,दिया है।जब टॉफ़ी मॉगी है तो टॉफ़ी दी है,झुनझुना मॉगा तो झुनझुना दिया है।तुम तो छोटे बच्चे हो,इसलिये यही मॉगते रहते हो।अब आगे से जो भी कहना हो बेटे लिखकर दे जाना।लिखना और कहना बराबर है और फिर हमारा जबाब सुनते जाना और नोट करके ले जाना कि गुरुजी ने यह वायदा किया है कि चौबीस पुरश्चरणों का जो पुण्य पहले कमाया था उसका और अब हमको तीन साल हो गये हैं,एकान्त मौन रहकर साधना की है,उसकी पुण्य-सम्पदा जो हमारे पास जमा है,उसमें आपका हिस्सा बराबर है।

                            परमपूज्य गुरुदेव
                   (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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मॉ को पेट में जब बच्चा आता है,तब क़ानूनन उसका हक़ बाप की जायदाद पर हो जाता है।इसी तरह हमारी कमाई पर आपका हक़ है।प्रार्थना मत कीजिये,निवेदन मत कीजिये,मनुहार मत कीजिये,वरदान मत माँगिये।आप अपना हक़ माँगिये,हम आपका काम करते हैं और आपको हक़ चुकाना पड़ेगा।आप बीमार रहते हैं तो हम आपकी बीमारी को अच्छा करेंगे।आप पैसे की तंगी में आ गये हैं तो हम उस तंगी को भी दूर करेंगे।आप लड़ाई-झगड़े में फँस गये हैं तो हम उसमें भी
आपकी मदद करेंगे।आप पर मुसीबत आ गई है तो आपकी ढाल बनकर उस मुसीबत को रोकेंगे।

                            परमपूज्य गुरुदेव
                     (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

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