अमृतवाणी-106/107/108
अमृतवाणी
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कालनेमि की कथा सुना रहा हूँ-स्कन्द पुराण की आपको।पूतना के कोई बाल-बच्चे नहीं थे।कालनेमि ने उससे कहा कि तेरे बच्चा नहीं होता है तो तू जादू का मन्त्र लेकर जा और श्री कृष्ण को दूध
पिला दे।तेरा दूध पियेगा तो अपनी माता को भूल जायेगा और तेरे पास रहने लगेगा।कालनेमि के बहकावे में आकर पूतना बेचारी गई कि मेरे बेटा नहीं
होता तो बेटा ले जाऊँ और बेटा तो मिला नहीं,उल्टे
थुक्केफजीहत और हुई।सूर्पनखा से कालनेमि ने
कहा- तू ब्याह करेगी ? उसने कहा-हॉ।वह बोला-
राक्षस तो काले-कलूटे होते हैं,मॉस खाते हैं,शराब
पीते हैं और गाली देंगे और मारेंगे भी।हम तुझे ऐसा
दूल्हा बताते हैं कि उससे ख़ूबसूरत तुझे दुनिया में
कहीं नहीं मिलेगा।बस तेरे जाने भर की देर है,तू गई
और ब्याह हुआ।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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राम के पिता के तीन ब्याह हुये थे राम के दो ब्याह करा देंगे।सीताजी भी बनी रहेंगी और तू भी बनी रहेगी और राजगद्दी पर बैठेगी।तू गोरी होगी और तेरे
बच्चे भी गोरे होंगे।सूर्पनखा कालनेमि के बहकाने पर रामचन्द्र जी के पास गई और अपनी फ़ज़ीहत
कराकर लौटी।उसकी बुद्धि जो बिगाड़ दी थी कालनेमि ने।मन्थरा की भी बुद्धि बिगाड़ दी थी उसने।उससे कहा भरत के साथ तेरा ब्याह करा देंगे।
ये जो कैकयी है वह जायेगी मर और तू रानी बनेगी,
राज्य करेगी।उसको साझा करके भरत के लिये राज्य मॉग ले। मन्थरा ने कैकयी को पट्टी पढ़ाकर
अपना काम बनाना चाहा।इस तरह दुनिया भर की
अंडम-बंडम करके उसने मन्थरा की भी मिट्टी पलीद
की ।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
अमृतवाणी
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कालनेमि की जो यह घटना है वह हमारे ऊपर भी लागू होती है।हमारे प्राणों से प्यारे बच्चे,हमारे हृदय
के टुकड़ों को अलग करके,बहका करके इनको हमसे दूर करने की कोई कालनेमि कोशिश कर रहा
है।तो गुरुजी आपका नुक़सान हो जायेगा ? नहीं,
बेटा, हमारा क्या नुक़सान हो जायेगा ? अभी ये लड़के गा रहे थे-कोई साथ न दे तो अकेला चल।अकेले चल देंगे हम।अकेले वामन ने सारी ज़मीन नापी थी।अकेले परशुराम ने सारी पृथ्वी पर से इक्कीस बार भार उतारा था और अकेले हम भी कम नहीं है,लेकिन हमको अपने बच्चे प्यारे लगते हैं।
बच्चों को कोई छीन ले जाये,चुरा न ले जाये,अगर
कोई घर में से बच्चों को उठा ले जाये तो मॉ-बाप को दु:ख होता है।हमें भी दु:ख होता है जब कोई
कालनेमि हमारे बच्चों को हमसे दूर कर देता है,बाग़ी
कर देता है।अपने ये जो बच्चे हैं,उनकी हमें फ़िकर है
कि कोई कालनेमि उनकी बुद्धि को भ्रष्ट न कर दे।
परमपूज्य गुरुदेव
(पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)
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