सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-17

आफ़ताब दिनोंदिन अपने में तल्लीन रहने लगा,हम जब  पहुँचते तो उसकी ख़ुशी देखते ही बनती थी ।शॉति माताजी सभी को बहुत प्यार करतीं, ख़ूब आशीर्वाद देती और हमेशा जेल से बाहर आते ही मुझ पर सवालों की बौछार करने लगती,बेटा बता न ? इतने प्यारे, इतने सुन्दर बच्चे क्यों ग़लती कर बैठे  ? बेटा बता न ? जबकि वे ख़ुद बहुत साधक स्तर की थीं।दरअसल सरलता में विशेषता हम  ढूँढ नहीं पाते, और वे बहुत सरल थीं। बहुत बार हमारे ही साथी उन्हें काफ़ी कुछ बुरा-भला कह जाते और वे जवाब न देकर रोकर रह जातीं। फ़िर जब भी मौका मिलता तो पूछतीं ? बेटा गुरुजी से जुड़कर भी लोग ऐसा क्यों करते हैं, गुरुदेव ने परिवार बनाया, लेकिन यहॉ तो लोग कुछ और ही समझते हैं।ख़ैर----
आफ़ताब की चित्रकारी अब सबके सामने आने लगी थी, हम भी अधीक्षक महोदय को ले जाकर दिखाते तथा उसमें जो परिवर्तन आया वह भी बताते। जेल परिसर में हम लोग बाहर के कोई परेशान या बीमार व्यक्ति, अनुष्ठान के लिए कहते तो बन्दी भाइयों से कराते थे। एक बार चण्डीगढ के एक हृदय रोग विशेषज्ञ के माता-पिता किसी जानकारी से मिलने आये, बहुत परेशान थे, डॉ. बेटे की मानसिक हालत काफ़ी खराब हो गई थी, प्रशासन से इज़ाजत लेकर हम उन्हें जेल परिसर में लेकर आये, बन्दी भाइयों से मिलवाया, सारी परिस्थितियाँ बताईं तथा डॉ.का फोटो दिखाया, वे लोग खुशी-खुशी अनुष्ठान के लिए तैयार हो गये। गायत्री मंत्र का सवालक्ष कम से कम जप और इतना ही महामृत्युंजय मंत्र का जप सबने मिलकर करने का संकल्प लिया और डॉक्टर भाई की फोटो अनुष्ठान की जगह गुरुदेव-माताजी की तस्वीर के सामने रख दी। हम लोगों को चण्डीगढ से फ़ोन पर वे लोग तबियत का हाल बताते और हम बन्दी भाइयों को बताते कि आपकी मेहनत कितना रंग ला रही है।एक दिन ऐसा भी आया कि वे माता-पिता दुबारा आये और बहुत ख़ुश होकर बन्दी भाइयों को कुछ देना चाहा इनाम बतौर, क्यों कि उनकी मेहनत और गुरुकृपा का परिणाम था जो उनका बेटा पूरी तरंह ठीक हो चुका था, हम कुछ कहें उससे पहले ही आफ़ताब बोल उठा अम्मीजान आपको देना ही है तो 10 लीटर पेन्ट दिला दीजिए, जेल की दीवारों पर गुरुजी के संदेश लिख देंगे और झट से कागज पर रंगों के नाम लिख कर दे दिये हम लोग आपस में एक-दूसरे को देखने लगे और गुरुसत्ता को मन ही मन धन्यवाद देने लगे कि असली पण्डित तो ये हैं जिन्होंने अनुष्ठान भी किये और दक्षिणा भी नहीं ली।जो बच्चा लूट और मर्डर केस में आया है आज आपने उसे कितना समझदार बना दिया कि उसे आप के काम की चिन्ता है, किसी भी तरह के इनाम से लगाव नहीं ।
हे गुरुदेव!ये आप ही कर सकते हैं, कोई और नहीं।
                                                      क्रमशः!
                                              'गुरुकॄपा केवलम्'
                                         "गुरुवर शरणम् गच्छामि "
                                                     👣🙏

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