सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-15

जब हम महिला जेल में पहुँचे तो सभी बहनों ने तैयारी कर रखी थी, अब उनमें से कुछ बहनों ने भजन सुनाये।बहुत ही भावविभोर होकर गाती थीं।शायद दुख में भगवान के साथ संबंध ज्यादा गहरा हो जाता है।कुछ आगे बैठने को लेकर झगड़ने लगती, तो दूसरी बहनें उन्हें शांत करतीं।बीती बार जिस ख़ूबसूरत प्यारी बच्ची से शीला ने मिलवाया था, कुसमा (परिवर्तित नाम) थी वह।आज बहुत खुश थी वह।अपना मन, अपनी बात कहकर ख़ाली जो कर चुकी थी वो,सब कुछ धीरे-धीरे अच्छा चल रहा था, अब ये सब भी हम सबका इन्तज़ार करने लगीं थीं।हमें भी उनसे मिलने की जल्दी होने लगी थी,इस बार हम उन सभी के लिए प्रसाद के साथ-साथ प्रशासन से अनुमति लेकर गुरुदेव-माताजी की तस्वीरें प्रत्येक बैरक में लगाने के लिए लाये थे। शीला के बच्चे के लिए भी अलग से कुछ खाने का लाये थे। कुछ गुरुदेव की किताबें, आरती, चालीसा आदि, ताकि जो बहनें पढ़ी-लिखी हैं,वे बाद में भी पढ़ सकें। कार्यक्रम के बाद सभी से पूछा कि क्या अब अगली बार हवन करें ?  कुछ तो समझती थीं,लेकिन जो नहीं समझ पाईं उन्होंने भी हामी भर दी ।अब अगली बार हवन के सामान की व्यवस्था करके लानी थी। मंत्र लेखन की कापियां और लाल रंग के पैन दिये जो बहनें लिख सकतीं थीं, उन्हें समझाया कि किस तरह लिखना है, जो नहीं लिख सकतीं थीं तथा पूरा मंत्र भी नहीं बोल पातीं थीं, उन्हें पँचाक्षरी मंत्र का अभ्यास
कराया। जिनको कापियां दीं और जिनको मंत्र दिया, उन सभी के नाम लिखे ताकि उनका उत्साह बढ़े और विश्वास में भी बढ़ोतरी हो सके। अगली ग्यारस तक के लिए उनके
पास गुरुदेव से और अधिक घनिष्टता से जुड़ने के लिए काम मिल चुका था।
यहाँ पर भी महिला जेलर के कमरे में कार्यक्रम के बाद आते,चाय पीते-पीते बन्दी बहनों की चर्चा होती, उनका
कहना था कि ये अपराधी हैं ज्यादा बात आप लोग न किया करें।ये औरतें कभी सच नहीं बोलतीं, आप आइये अच्छी बात है लेकिन इनसे किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत बात न किया करें।अब मुश्किल ये थी कि उन्हें कैसे समझाया जाये कि जन्म से कोई अपराधी नहीं होता, व्यक्ति के हालात और परिस्थितियां तथा कभी-कभी आदतन भी ऐसा हो जाया करता है। जब जँगली जानवर भी प्यार से सुधारे जा सकते हैं तो इनसान क्यों नहीं  ?

                                     क्रमशः!
                            'गुरुकॄपा केवलम्'
                       "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                   👣🙏

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