सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-26

गायत्री मन्त्र का प्रत्यक्ष प्रभाव अब तो और भी स्पष्ट दिखाई देने लगा था। जिन भाइयों ने अनुष्ठान शुरू किया था,उन्हें अचानक ही प्रशासन की तरफ़ से बहुत काम मिलने लगा।क्या करें क्या न करें दिमाग काम नहीं कर रहा था।अब उन्हें भी लगने लगा कि अनुष्ठान गलत ही शुरू किया इससे तो नहीं उठाते तो अच्छा था। लेकिन अचानक ही उन लोगों को समय मिलने लगा, काम के बीच में ही जप का समय निकालने लगे क्यों कि जेल स्टॉफ में भी काफी फेरबदल हो गया था। जो लोग ज्यादा सख्ती दिखाते थे जप-यज्ञादि उनकी नज़र में बेवकूफी के काम थे शायद उन्हीं लोगों को गुरुदेव ने इधर-उधर बदलाव कर दिया था। देखने में तो अचानक ही प्रशासन की तरफ़ से किया गया था लेकिन अदृश्य कर्ता कोई और ही था,ऐसा हम सभी सोच रहे थे ।इधर जो भाई नेमी (बदला हुआ नाम) रात भर ध्यान और भाव यज्ञ करता था, उसे भी दिन ब दिन बढ़ोतरी होने लगी साधना में । एक दिन हमसे बोला दीदी जी उसका बाप ठीक हो गया है लेकिन वो बता नहीं रहा है।आप पूछो उससे  ? जब उस सिपाही भाई को बुलाकर पूछा तो बोला मैडम जी आप पूजा बन्द मत कराना, पिताजी तो ठीक हो रहे हैं, पर मेरी बेटी का रिश्ता और घर में घरवाली की हालत बहुत खराब है सदमे के कारण।मैडम हालात ठीक होते ही मैं आपको सबसे पहले बताऊँगा।और एक दिन का यज्ञ का खर्च मैं ही करूँगा गायत्री माता के चरणों में।बस थोड़े दिन और ! उसके बाद जो बच्चे अनुष्ठान कर रहे थे उनको बहुत ही प्यार से बोला कि देखो रे तुम्हें कोई परेशान नहीं करेगा और फ़िर भी कोई बात हो तो मुझे बताना। उसके इस बदले हुये व्यवहार पर मन ही मन वे लोग नाराज़ हो रहे थे।जब वो सिपाही चला गया तो साधकों का गुस्सा निकल पड़ा, कहने लगे कि ये बड़ा मतलबी है काम निकलने के बाद ये फ़िर वैसा ही हो जायेगा।अब हम प्रार्थना इसके लिए नहीं करेंगे, इसका बाप ठीक हो तो गया।बहुत देर तक उन्हें समझाना पड़ा कि तुम्हारी प्रार्थना में कितनी सच्चाई है कि उसने ख़ुद महसूस किया है और इसका पुण्य तुम्हें भी तो मिलेगा।तब कहीं जाकर वे आगे जप बढ़ाने के लिए तैयार हुये।लगभग दो से ढाई महीने तक वे लोग नि:स्वार्थ भाव से साधना में लगे रहे। बीच-बीच में उन्हें दुर्व्यवहार याद आने पर सनक उठ जाती थी, लेकिन समझाने पर मान जाते थे।
                                         क्रमशः!
                                  'गुरुकॄपा केवलम्'
                              "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                          👣🙏

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