गुरुगीता-29
पूसलार एक संत थे जो दक्षिण भारत के एक शहर में रहते थे। उस इलाके का राजा एक विशाल शिव मंदिर बनवा रहा था। बहुत सालों के बाद मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने वाला था। वह मंदिर जो राजा के जीवन का सपना था, उसके उदघाटन समारोह से एक रात पहले राजा के सपने में शिव आए और कहा, “मैं तुम्हारे मंदिर के उदघाटन में नहीं आ पाऊंगा। क्योंकि पूसलार ने इसी शहर में दूसरा मंदिर बनवाया है। मुझे वहां जाना है। उसके मंदिर का भी उदघाटन कल ही है।”
राजा एक भय के साथ जागा क्योंकि इतने सालों तक यह मंदिर बनाने के लिए मेहनत करने के बाद, इतना पैसा और श्रम लगने के बाद, शिव कह रहे हैं कि उन्हें इसी शहर में पूसलार के बनवाए हुए किसी दूसरे मंदिर में जाना है। “कौन है यह पूसलार और यह कौन सा मंदिर है, जिसके बारे में मैं नहीं जानता?” वह पूसलार की तलाश में लग गया।
बहुत दिनों की तलाश के बाद, उन्हें एक छोटी सी झोंपड़ी में पूसलार मिले, जो पेशे से मोची थे। उन दिनों मोची के पेशे को हिकारत की नजर से देखा जाता था। राजा ने जाकर उनसे पूछा, “तुम्हारा मंदिर कहां है? शिव का कहना है कि वह तुम्हारे मंदिर में जाएंगे, मेरे मंदिर में नहीं। कहां है मंदिर?” पूसलार बोले, “मैंने उसे अपने मन में बनाया है।”
उन्होंने एक-एक ईंट, एक-एक पत्थर करके धीरे-धीरे कई सालों तक अपने मन में वह मंदिर बनाया था और ऐसा मंदिर पत्थरों और ईंटों से बने मंदिर से कहीं अधिक असली होता है।
ईश्वर और गुरु भावप्रिय होते हैं, उनकी कृपा से सब कुछ संभव है ।
गुरुगीता पाठ
=========
चैतन्यं शाश्वतं शान्तं व्योमातीतं निरंजनं।
बिन्दुनादकलातीतं तस्मै श्री गुरवे नम:।।31।।
अर्थ
===
जो इस जड़ जगत के कारण-स्वरूप हैं और जो चैतन्य, नित्य, निश्चल आकाश से परे, उपाधिशून्य एवं बिन्दु,नाद और कला से अतीत हैं, उन श्री गुरुदेव को प्रणाम करता हूँ ।।31।।
।।31।। I offer my Salutation to the Master the eternal, conscious, peaceful beyond void and devoid of blemish, He is also beyond Bindu 'Nada and Kala '.
COMMENTS
============
Devotee with the help of practices of Brahma with attributes practically realises the Deity and experiences the liberated state during life and finally in order to obtain emancipation after death or samadhi of attribute-less-ness, practices the Brahma Mantra known as Pranava. The Pranava is made up of Aa, Oo, Ma, Nada, Bindu, Kala and state beyond Kala. The Akara is the gross physical body, Ookara is the subtle body while the Makara is the causal body. The Akar merges, into Ookara; Oookara merges into Makara and Makara merges into Nada- The Nada has four stages beginning with Nada, Bindu, Kala and beyond Kala Kala-tita. While Kala is Mahad Tatva Buddhi and Bindu is Ahankar, Kala-Tita i.e. beyond Kala is Nature and beyond it is the Master.
👣🙏
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें