अमृतवाणी-109/110/111

अमृतवाणी
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कालनेमि से हमारा नुक़सान है।उसकी हमें फ़िकर रहती है और कोई फ़िकर नहीं।न मिशन की फ़िकर
रहती है और न मरने की,न काम की।मिशन बढ़ रहा
है और वह बढ़ेगा ही।काम भी हो रहा है।उसकी फ़िकर थोड़े ही है।काम तो बढ़ ही रहा है।गंगा में बाढ़ तो आयेगी,रुकेगी नहीं।उसे रोकने वाला कोई
नहीं है।मिशन के लिये हम नहीं कहते कि आप कोई
सहायता कीजिये।कहते हैं तो इसलिये कि नफ़ा होगा आपको।आप नेता हो जायेंगे।सरदार पटेल,नेहरू,जार्ज वाशिंगटन,अब्राहम लिंकन बन जायेंगे।नेता बनना जिनको पसन्द होवे आगे आयें,
क़दम से क़दम और कन्धे से कन्धा मिलाकर चलें।
साथ नहीं चलेंगे तो योग्य आदमी कैसे बनेंगे ?

                           परमपूज्य गुरुदेव
                    (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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मित्रो ! भगवान को लेकर आपने तो न जाने क्या-क्या कल्पनायें कर रखी हैं कि मरेंगे तो स्वर्गलोक में
जायेंगे।कहॉ मरेंगे आप ? शरीर बदल लेते हैं बार-बार।कपड़ा पुराना होता है तो बदल लेते हैं।नहाना भी पड़ता है।बनियान में गन्ध आ जाती है,धोती में गन्ध आ जाती है तो रोज़ धोकर के दूसरी बदल लेते हैं।दूसरे दिन फिर दूसरी बदल लेते हैं।मरेंगे,
मरकर फिर कहॉ जायेंगे ? बैकुण्ठ लोक में जायेंगे।
कहॉ है बैकुण्ठ ? बैकुण्ठ इसी ज़मीन पर है।आपको
मालूम नहीं है।स्वर्ग भी इसी जगह है और नर्क भी।
देवता भी इसी जगह पर रहते हैं और राक्षस भी।
इन्सान भी इसी में रहते हैं।ये सारी क़िस्में मनुष्यों
की हैं।

                     परमपूज्य गुरुदेव
            (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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तरक्की के लिये मैट्रिक के बाद आप बी.ए.कर लें,
बी.ए. के बाद आप एम.ए. कर लें और पोस्ट ग्रेजुएट
हो जायें।इसी तरीक़े से सिपाही से आप दरोग़ा हो
जायें,दरोग़ा से आप सुपरिन्टेडेंट हो जायें।इस तरीक़े
से बहुत से चान्स है।आप चाहें तो एक और भी मौक़ा है कि देवताओं के बाद आप भी भगवान हो सकते हैं।भगवान ? हॉ भई भगवान भी हो सकते हैं।
इन्सान परब्रह्म नहीं हो सकता,पर भगवान हो सकता
है।परब्रह्म और भगवान में क्या फ़र्क़ है ? परब्रह्म वह
है जो सारे के सारे ब्रह्माण्ड पर नियन्त्रण रखे हुये है,
क़ाबू रखे हुये है,क़ब्ज़ा रखे हुये है।सारी सृष्टि का
संचालन जो व्यवस्थित रूप से चलाता है और बनाता है उसका नाम है परब्रह्म।भगवान उनको कहते हैं,जिन्हें हम देवदूत कहते हैं जो विश्व की
व्यवस्था को क़ायम रखने के लिये जाने जाते हैं और
अपना काम करने के बाद चले जाते है।इन्हें अवतार
भी कहते हैं-जैसे भगवान रामचन्द्र जी,भगवान कृष्ण
जी,भगवान परशुराम और बुद्ध आये।आदमी का ऊँचे से ऊँचा स्तर भगवान का है।आपके लिये चॉस
है।इन्सान का जन्म पाकर के ठीक तरीक़े से अपनी
मँजिल के ऊपर चढ़ते चले जायें ताकि वह सब पा
सकें।इसी का स्मरण दिलाने,जानकारी कराने के
लिये संस्कार कराये जाते हैं।

                           परमपूज्य गुरुदेव
                   (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

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