सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-29

,अबकी बार सिपाही भाई की तरफ़ से यज्ञ था।बन्दी भाई भी ख़ुश और वह भाई भी ख़ुश, क्यों कि गुरुदेव ने उसकी बड़ी-बड़ी समस्याओं का समाधान जो कर दिया था।बहुत ही उत्साह था सभी में,बन्दी भाइयों की साधना के फलस्वरूप गुरुदेव ने सिपाही भाई की समस्याओं का समाधान जो कर दिया था।अच्छे से यज्ञ सम्पन्न किया तथा पूर्णाहुति के लिये वह भाई "अधीक्षक महोदय" को बुलाकर ले आया और खुश होकर उनको भी बन्दियों द्वारा किये गये अनुष्ठान के बारे में बताया।प्रसाद में भी अनुष्ठान करने वाले भाइयों को जी भरकर लड्डू खाने का मौका मिलने से सभी बहुत ख़ुश थे।नेमी के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हो रहा था। वह भी यज्ञ में मौजूद रहा,सभी के चेहरे खिले-खिले थे।अब तो हम किसी के लिए भी अनुष्ठान कर सकते हैं, कोई भी परेशान हो या बीमार हो तो आप मना मत करना दीदी।हमें ये मौका जरूर देना।जिन भाइयों ने अनुष्ठान किया था वे उत्साहित होकर बोल रहे थे और इसी बीच एक बन्दी भाई जो काफ़ी दबंग व हृष्ट-पुष्ट था,आकर कहने लगा कि मेरे लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप कहीं भी करा दीजिए, मेरी मम्मी को किन्हीं पंडित जी ने बताया है, मेरे लिए बहुत खराब समय है।हम लोग कुछ बोलें-उससे पहले ही उन उत्साहित भाइयों ने उसको कहा कि दीदी-भाईसाहब यदि कह देंगे तो हम लोग कर देंगे। और सचमुच एक साल तक उन सबने यज्ञ में उसकी सुरक्षा केलिये आहुतियां दीं और इतने ही समय तक अनुष्ठान भी किया। यह बात अलग है कि उन भावुक भाइयों के वह
डॉन कभी काम नहीं आया जबकि प्रशासन में उसका अच्छा दबदबा था। लगभग एक साल बाद पूर्णाहुति जब की गई,तब वह उसमें शामिल हुआ और कुछ दिनों बाद ही वह खुली जेल में चला गया। वहॉ जाने पर कुछ दिनों तक सब ठीक-ठाक चला।लेकिन एक दिन अचानक उसके गाड़ी से उतरते ही कुछ लोगों ने उस पर जानलेवा हमला कर दिया।उसे मरा हुआ समझकर वे लोग छोड़ कर चले गए।बाद में पता चला कि उसे बहुत गंभीर चोटें आई हैं जिसमें एक ऑख चली गई तथा बहुत सारे घाव पूरे शरीर पर हो गये थे, जिन्हें ठीक होने में भी साल से ज़्यादा वक्त लगा, लेकिन गुरुदेव ने उसे जीवन दान दे दिया। ऐसा केवल गुरु ही कर सकते हैं।
                    क्रमशः!!

                                   'गुरुकृपा केवलम्'
                              "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                          👣🙏

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