दिले शायरी -22

उसकी ख्वाहिश थी मेरे हालात बदलने की
वो ख़फा है कि मैं हालात के साथ क्यूँ नहीं बदली!!

आया ही था ख़याल कि ऑखें छलक पड़ीं
ऑसू किसी की याद के कितने करीब हैं!!

मैं अपने दर्द पर ऑसू बहाऊँ तो कितने आखिर
यहाँ हर शख्स की मुझ जैसी कहानी निकली!!

वो रूलाकर हँस पाया देर तक
जब मैं रो कर मुस्कराया देर तक
गुनगुनाता जा रहा था एक फकीर
धूप रहती है न साया देर तक!!

बहुत सा पानी छुपाया है मैंने अपनी पलकों में
जिन्दगी बहुत लम्बी बहुत है
क्या पता कब प्यास लग जाये !!

जिन्दगी तुझसे हर कदम समझौता क्यों किया जाये
शौक जीने का है मग़र,इतना भी नहीं कि
मर-मर के जिया जाये!!

कल रात मैंने अपने सारे ग़म
कमरे की दीवार पर लिख डाले
बस फिर हम सोते रहे और दीवारें रोती रहीं!!

बक्से अतीत के यूँ ही खोले नहीं जाते
जज्बात सारे,शब्दों से तो तोले नहीं जाते!!

मौत को मैंने कभी देखा नहीं
पर यकीनन बहुत खूबसूरत होगी
जो भी मिलता है उससे
जीना छोड़ देता है!!

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