अमृतवाणी-46/47/48

अमृतवाणी
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दर्शन जिसको जन्म देती है,वह है-मनीषा । मनीषा को हम ऋतम्भरा-प्रज्ञा भी कह सकते हैं।दूसरे शब्दों
में हम इसे गायत्री कह सकते हैं।श्रेष्ठ चिन्तन करने
वालों के समूह का नाम है मनीषा।इस मनीषा का हम आह्वान करते हैं,उसकी पूजा करते हैं।मनीषा मॉ
है।मॉ क्या करती है?मॉ बच्चे के लिये समय-समय
पर ज़रूरत की चीज़ें बनाकर खिलाती है,उसे छाती का दूध पिलाती है?हजम कर सके,ऐसी खुराक बना
कर देती है मॉ।
  
                              परमपूज्य गुरुदेव
                      (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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कुम्भ नहाइये बैकुंठ को जाइये,यह कौन सा धर्म है?
ऐसे धर्म को बदलना होगा व विज्ञान व्दारा दिग्भ्रान्त
की जा रही पीढ़ी को भी मनीषा को ही मार्गदर्शन देना होगा।आपको युग की ज़रूरतें पूरी करनी चाहिये।आदमी के भीतर की आस्थायें कमज़ोर हो
गई हैं,उन्हें ठीक करना चाहिये।आज की भाषा में
बात कीजिये व लोगों का समाधान कीजिये।विज्ञान
की भाषा में,नीति की,धर्म की,सदाचार की,आस्था
की बात कीजिये व सबका मार्गदर्शन करिये।बताइये सबको कि आदर्शों ने सदैव जीवन में उतारने के बाद फ़ायदा ही पहुँचाया है,नुक़सान किसी का नहीं किया ।

                             परमपूज्य गुरुदेव
                     (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

अमृतवाणी
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पात्रता आपकी बढ़ेगी तो भगवान की चार नियामतें,
चार विभूतियॉ आपको मिलती चली जायेंगी।एक
विभूति का नाम ऋत है। ऋत क्या है ? ऋत उसे कहते हैं,जिसमें क़ीमती चीज़ें जुड़ी हुई हैं,साजों-
सुरक्षा-शालीनता-अन्त:प्रेरणा।ऋत जिस किसी के
हिस्से में आता है,वह अपना कल्याण करता है और
अपना कल्याण करके वह सीमित नहीं रह जाता,
समाज का उत्तरदायित्व सँभालता है,सारी मनुष्य
जाति का मार्गदर्शन करता है,और इस पृथ्वी पर
ख़ुशहाली लाता है।ऋत उस वर्ग के हिस्से में आता है, जिसको हम सभी ब्राह्मण कहते हैं ।

                             परमपूज्य गुरुदेव
                     (पन्डित श्रीराम शर्मा आचार्य)

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