गुरुगीता-30

दक्षिण भारत में सदाशिव ब्रह्मेंद्र नाम के एक योगी थे। वह निर्काया थे, यानी उन्हें शरीर की कोई सुध नहीं थी। जिस व्यक्ति को शरीर की सुध नहीं होती, उसे कपड़े पहनने का ध्यान भी नहीं आता। इसलिए वह नग्‍न ही घूमते थे। उन्हें किसी तरह की सीमा और संपत्ति का भी होश नहीं था। एक दिन वह कावेरी नदी के तट पर स्थित राजा के उद्यान में पहुंच गए। राजा अपनी रानियों के साथ आराम कर रहा था। तभी उसने सदाशिव ब्रह्मेंद्र को उद्यान में स्त्रियों के सामने नग्‍न चलते देखा। सदाशिव ब्रह्मेंद्र के लिए पुरुष या स्त्री का कोई भेद नहीं था। राजा क्रोधित हो गया। “कौन है यह मूर्ख जो मेरी रानियों के सामने नग्न हो कर आ गया है।” उसने अपने सैनिकों को बुलाकर आदेश दिया, “पता लगाओ कि यह मूर्ख कौन है?” सिपाही उसके पीछे दौड़े और योगी को पुकारा। उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और बस चलते रहे। सिपाहियों ने क्रोधित होकर अपनी तलवार निकाल ली और उन पर वार किया। उनका दाहिना हाथ कट गया। लेकिन उनकी चाल नहीं थमी। वह चलते रहे। यह देखकर सैनिक डर गए। उन्हें लगा कि यह कोई साधारण मनुष्य नहीं है। अपना हाथ कटने के बाद भी वह चल रहा है! राजा और सिपाही उनके पीछे दौड़े, उनके पैरों पर गिर पड़े और उन्हें वापस उद्यान में ले कर आए। उन्होंने अपना बाकी जीवन उसी उद्यान में बिताया और वहीं पर शरीर त्यागा।
गुरुगीता पाठ
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ज्ञान शक्ति समारूढ़ं तत्वमालाविभूषितम्।
भुक्तिमुक्तिप्रदातारं तस्मै श्रीगुरवे नम:।।32।।
अर्थ
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जो ज्ञान और शक्ति सम्पन्न हैऔर प्रकृति ,महत् तत्व, अहंकार: शब्द, स्पर्श, रूप, रस,गन्ध-पंचतन्मात्र,मन, श्रोत्र, त्वक, चक्षु, जिव्हा, घ्रणा,-पंच ज्ञानेन्द्रिय:,वाक्, पाणि, पाद: पायु ,उपस्थित,-पंच कर्मेन्द्रिय और पृथ्वी, जल,तेज, मरुत, व्योम, -पंच महाभूत:इस चौबीस तत्वमाला द्वारा विशेष रूप से भूषित हैं-उन भोग और मोक्ष प्रदाता श्री गुरुदेव को मैं प्रणाम करता हूँ ।।32।।
32.
I offer my salutations to the Master who is
endowed with knowledge and power and is specially  decorated by the garland of Twenty four Tatvas and is the bestower of earthly pleasures during life and of emancipation later on. These 24 elements are:

1. Prakrati 2.Mahad 3. Ahankar 4. Shabda 5. Touch 6. Form 7. Taste 8. Smell. (The five tan-Matras) 9. Manas 10 Ears 11. Skin 12. Eyes 13. Tongue (Taste) 14. Nose (The  five sense organs) 15. Tongue (Speech) 16. Hands 17. Feet 18. Rectum 19. Penis (The five Motor organs) 20. Earth 21 Water 22. Fire 23. Air and 24. Ether (The five Maha Bhutas).

                                           👣🙏

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